समस्त कठिनाइयों का एक ही उद्गम है मानवीय दुर्बुद्धि। जिस उपाय से दुर्बुद्धि को हटाकर सदबुद्धि स्थापित की जा सके, वही मानव कल्याण का, विश्वशांति का मार्ग हो सकता है। युगऋषि परम पूज्य पं0 श्रीराम शर्……続きを見る
著者:Agyeya, अज्ञेय
出版社: Bhartiya Sahitya Inc.
発売日: 2013年01月10日
प्रख्यात साहित्यकार अज्ञेय ने यद्यपि कहानियां कम ही लिखीं और एक समय के बाद कहानी लिखना बिलकुल बंद कर दिया, परन्तु हिन्दी कहानी को आधुनिकता की दिशा में एक नया और स्थायी मोड़ देने का श्रेय भी उन्हीं क……続きを見る
तीन वस्तुएँ प्राप्त होती हैं - विजय, विवेक और विभूति, परन्तु किसको? एक शब्द जोड़ दिया गया कि जो ‘सुजान’ हैं। ‘रामायण’ का पाठ और श्रवण तो बहुधा अनेक लोग करते ही रहते हैं, परन्तु गोस्वामीजी ने जो ‘सुज……続きを見る
कौन कहता है कि कहानी का अंत हो चुका है? भारत में तो अभी-अभी इसका पुनर्जन्म हुआ है और साहित्यिक पंडितों के अनुसार इसकी जन्मपत्री में लिखा है कि इसकी उम्र बहुत लंबी और समृद्ध होगी। अन्य अनेक विकासशील ……続きを見る
जिंदगी को इस तरह नहीं लिया जा सकता कि वह यहाँ से शुरू है और यहाँ खत्म, बहुत सोचने के बाद मेरा यही विचार बना, क्योंकि जहाँ से शुरू का छोर पकड़ती हूँ, वहीं डोर छिटक जाती है। क्या जन्म से मनुष्य का जीव……続きを見る
मृतलाल नागर हिन्दी के उन गिने-चुने मूर्धन्य लेखकों में हैं जिन्होंने जो कुछ लिखा है वह साहित्य की निधि बन गया है। सभी प्रचलित वादों से निर्लिप्त उनका कृतित्व और व्यक्तित्व कुछ अपनी ही प्रभा से ज्योत……続きを見る
आधुनिक हिन्दी कहानी के सफर में भीष्म साहनी एक महत्वपूर्ण नाम है। उनकी सर्वाधिक प्रिय कहानियों के इस संकलन में जीवन और समाज से गहरे जुड़े प्रश्नों को प्रस्तुत किया गया है। इनमें से अनेक कहानियाँ बेहद……続きを見る
जोशी जी ने कहानियों का सृजन करते हुए यह अनुभव किया कि उनमें जीवन के वैविध्य और विस्तार के लिए बहुत कम जगह होती है। यह जगह तो रचना-कर्म में उपन्यास के ही पास होती है। इसीलिए वे कहानी-कला से धीरे-धीरे……続きを見る
ज़िंदगी की कहानी से बड़ी कोई कहानी नहीं हो सकती। कहानी लिखना कोई बहुत आसान काम नहीं होता। लेकिन अपनी कहानियों के बारे में कुछ लिखना बेहद कठिन लगता है (मुझे)। एक दुष्कर कर्म। कहानी लिखना और कहानी के ……続きを見る
हिन्दी कहानी को कथा और शैली दोनों ही दृष्टियों से नई दिशा देनेवाले लेखकों में मोहन राकेश का अग्रणी स्थान है। उन्होंने कम ही लिखा परन्तु उनकी अनेक कहानियाँ साहित्य की अमर निधि बन गईं। प्रस्तुत संकलन ……続きを見る
रवीन्द्रनाथ टैगोर उन साहित्य-सृजकों में हैं, जिन्हें काल की परिधि में नहीं बाँधा जा सकता। रचनाओं के परिमाण की दृष्टि से भी कम ही लेखक उनकी बराबरी कर सकते हैं। उन्होंने एक हज़ार से भी अधिक कविताएँ लि……続きを見る
इस संसार का अपना एक इतिहास है। तमाम-उखाड़-पछाड़ों के बाद आज भी हम जिस बिंदु तक पहुँचे हैं, हमारे पास जानकारी का दायरा इसके अन्तर्गत बहुत ही नगण्य है। अब जब हम कहानी की बात शुरू करते हैं, हमारी विस्त……続きを見る
विष्णु प्रभाकर के जीवन पर गांधी जी के दर्शन और सिद्धांतों का गहरा असर पड़ा। इसके चलते ही उनका रूझान कांग्रेस की ओर हुआ और स्वतंत्रता संग्राम के महासागर में उन्होंने अपनी लेखनी का भी एक उद्देश्य बना ……続きを見る
इस किताब को पढ़ने के बाद शायद आप इस सवाल का जवाब दे सकेंगे...शायद आप मुझसे यह सवाल भी करें कि मैंने इन कहानियों का चयन क्यों किया ? लेकिन मैं यह सवाल आपसे करूँगी। मैंने विभिन्न दौर में लिखी हुई कहान……続きを見る
रामधारी सिंह दिवाकर की इन कहानियों में गाँव का जटिल यथार्थ आद्यंत उपलब्ध है। गाँवों की सम्यक् तस्वीर का आधुनिक रूप जो विकास और पिछड़ेपन के संयुक्त द्वंद्वों से उत्पन्न होता है, वही यहाँ चित्रित हुआ ……続きを見る
हिन्दी-कहानी में आधुनिक-बोध लाने वाले कहानीकारों में निर्मल वर्मा का अग्रणी-स्थान है। उन्होंने कम लिखा है परंतु जितना लिखा है उतने से ही वे बहुत ख्याति पाने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहानी की प्रचलि……続きを見る
इन दस कहानियों में मैंने अपनी प्रारंभिक कहानी ‘छुटकारा’ इसलिए दी कि उसमें कच्ची धान की बाली की गंध है। मैंने जब लिखना शुरू किया था, प्रायः उस उम्र में आजकल लेखिकाएँ नहीं लिखतीं। आजकल प्रौढ़ अवस्था म……続きを見る
आबिद सुरती की कहानियाँ अनुभव की गहराई और रंगों की चटख से रची कहानियां हैं। इनमें रचनाकार के संघर्ष की ध्वनि तो मिलती है, साथ ही संघर्ष से हताश न होकर नए संघर्ष की भूमि तलाशती मानसिकता की शक्ति का ओज……続きを見る
कहानियाँ मेरे लिए मूलतः ‘असहमति’ का माध्यम हैं। इस असहमति के स्तर और क्षेत्र क्या रहे हैं, यह कहानियाँ खुद ही बता देंगी। जब से अपने चारों तरफ की दुनिया की ओर देखना शुरू किया तो पाया, कहीं कुछ भी नही……続きを見る
मैंने और मेरी पीढ़ी के अन्य कथाकारों ने थोक में कहानियां नहीं लिखीं। किसी ने पचास तो किसी ने दो कम या दो ज़्यादा। इस मामले में हमारी पीढ़ी के कथाकार बहुत खुशनसीब थे कि इन थोड़ी-सी कहानियों में प्राय……続きを見る
हिन्दी साहित्य के शिखर रचनाकार श्रीलाल शुक्ल की कहानियों का यह संग्रह एक अप्रतिम लेखक के अपने सामाजिक यथार्थ पर अचूक पकड़ और उसे बयान करने की उसकी अद्भुत कला का साक्ष्य है। इसकी कहानियाँ हिन्दी कहान……続きを見る
हिन्दी के कहानी लेखकों में मन्नू भंडारी का अग्रणी स्थान है। उनकी कहानियों में नारी-जीवन के उन अन्तरंग अनुभवों को विशेष रूप से अभिव्यक्ति दी गई है जो उनके नितांत अपने हैं और पुरुष कहानीकारों की रचनाओ……続きを見る
अब उसका रिवाल्वर जगत के हाथों में था।..... वह उस पर रिवाल्वर ताने गुर्रा रहा था-'हरामी पुत्तर, अपने मामले में घपलेबाजी मुझे बर्दाश्त नहीं। अपने भी कुछ उसूल हैं वरना अर्न्तराष्ट्रीय स्तर की ठगी का धन……続きを見る
आचार्य चतुरसेन कुशल उपन्यासकार होने के साथ-साथ प्रतिष्ठित चिकित्सक भी थे। चिकित्सा उनका व्यवसाय भी था और देश के राजा-नवाब तथा जागीरदारों की चिकित्सा में उन्होंने विशेष ख्याति अर्जित की थी। स्वस्थ और……続きを見る
घुमक्कड़ क्यों दुनिया की सर्वश्रेष्ठ विभूति है? इसीलिए कि उसीने आज की दुनिया को बनाया है। यदि आदिम-पुरूष एक जगह नदी या तालाब के किनारे गर्म मुल्क में पड़े रहते, तो वह दुनिया को आगे नहीं ले जा सकते थ……続きを見る
भारतीय साहित्य की नीति और लोक कथाओं का विश्व में एक विशिष्ट स्थान है। इन लोकनीति कथाओं के स्रोत हैं, संस्कृत साहित्य की अमर कृतियां - पंचतंत्र एवं हितोपदेश। पंचतंत्र के रचयिता श्री विष्णु शर्मा ने अ……続きを見る
देवकी नन्दन खत्री का एक अनूठा उपन्यास... ठीक दोपहर का वक्त और गर्मी का दिन है। सूर्य अपनी पूरी किरणों का मजा दिखा रहे हैं। सुनसान मैदान में दो आदमी खूबसूरत और तेज घोड़ों पर सवार साये की तलाश और ठंडी……続きを見る
धर्म के नाम पर आज ढोंग और दम्भ का पार नहीं रहा है। परमात्मा को, उसके नाम को और उसके दिव्य धर्म को भुलाकर जगत् आज ऊपर की बातों में ही लड़ रहा है। इसीलिए न तो आज धर्मकी उन्नति होती है और न कोई सुखका स……続きを見る
गीता प्रेस से प्रकाशित 'कल्याण' के 'बालक-अंक' में प्रकाशित 19 वीर बालकों के चरित्र इस पुस्तक में प्रस्तुत कर रहे हैं। ये चरित्र अपूर्व आत्मत्याग तथा बलिदान के सजीव चित्र हैं। आशा है इन्हें पढ़कर बच्……続きを見る
यह पुस्तक नहीं, अभियान है। पत्रकारिता के एक-एक छात्र, नयी पीढ़ी के एक-एक पत्रकार तक पहुंचना इस पुस्तक का पहला और अंतिम लक्ष्य है, ताकि पत्रकारिता की आत्मा को रौंद रहे बाजार का कुरूप चेहरा हमेशा के ल……続きを見る