स्वामीजी ने ज्ञानयोग का विवेचन उपनिषद् तथा भगवद्रीता के आधार पर किया है और इस प्रकार इन प्रवचनों में उन्होंने यह स्पष्ट दर्शाया है कि ज्ञानयोग साधक को किस तरह मुक्ति के लक्ष्य की ओर ले जाता है। साथ ……続きを見る
यह पुस्तक स्वामी विवेकानन्दजी के मौलिक अंग्रेजी लेखों का हिन्दी अनुवाद है। इस पुस्तक में स्वामीजी ने पुनर्जन्म के सम्बन्ध में हिन्दू-मत तथा पाश्चात्य-मत दोनों की बडी सुन्दर रूप से विवेचना की है और इ……続きを見る
स्वामी विवेकानन्द के सन्देशों में भारत के आध्यात्मिक भण्डार का सारतत्त्व समाहित है जिसे उन्होंने आधुनिक परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक आधार पर सहज-सरल शब्दों में हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है। ये सभी विश……続きを見る
मेरा जीवन तथा ध्येय नामक यह भाषण स्वामी विवेका नन्द ने 27 जनवरी 1900 ई0 में पासाडेना, कैलीफोर्निया के शेक्सपियर क्लब में दिया था। इसमें दुःखी मानवों की वेदना से विह्वल उस महात्मा का बोलता हुआ चित्र ……続きを見る
सोचो कि तुम्हारे हृदय में एक आकाश है, और उस आकाश के अन्दर अग्निशिखा के समान एक ज्योति उद्भासित हो रही है - उस ज्योतिशिखा का अपनी आत्मा के रूप में चिन्तन करो; फिर उस ज्योति के अन्दर और एक ज्योतिर्मय ……続きを見る
एकाग्रता ही सभी प्रकार के ज्ञान की नींव है, इसके बिना कुछ भी करना सम्भव नहीं है। ज्ञानार्जन के लिए किस प्रकार मन को एकाग्र करना चाहिए इसका दिग्दर्शन इस पुस्तिका में किया गया है। एकाग्र मन एक सर्च ला……続きを見る
कुछ भी न मांगो, बदले में कोई चाह न रखो। तुम्हें जो कुछ देना हो, दे दो। वह तुम्हारे पास वापस आ जाएगा; लेकिन आज ही उसका विचार मत करो। वह हजार गुना होकर वापस आयेगा, पर तुम अपनी दृष्टि उधर मत रखो। देने ……続きを見る
इस पुस्तक में स्वामीजी के उन चुने हुए सद्वाक्यों एवं विचारों का संग्रह है, जो उन्होंने विभित्र विषयों पर प्रकट किये थे। ये विचार केवल किसी व्यक्ति के लिए ही लाभदायक नहीं, वरन्, समस्त राष्ट्र की उन्न……続きを見る
सत्य में तप, संयम और शेष समस्त गुणों का वास होता है। जैसे समुद्र मत्स्यों का कारण (उत्पत्तिस्थान) है, वैसे ही सत्य समस्त गुणों का कारण है। - भगवान महावीर続きを見る
पवहारी बाबा के प्रति स्वामी जी की बड़ी श्रद्धा और निष्ठा थी। इन महात्मा का जीवन कितना उच्च तथा उनकी आध्यात्मिक साधनाएँ कितनी महान् थीं इसका संक्षिप्त विवरण हमें इस पुस्तक से प्राप्त होगा। हम कह सकते ……続きを見る
प्रस्तुत पुस्तक स्वामी विवेकानन्द के धर्म सम्बन्धी प्रसिद्ध व्याख्यानों का संग्रह है। इनमें धर्म के सार्वभौमिक स्वरूप के महत्व को अत्यन्त विशद रीति से पुरस्सर किया गया है तथा समस्त धर्मों के अन्तिम ……続きを見る
गुरु नानक की वाणी' पुस्तक में गुरु नानक के महत्वपूर्ण उपदेशों का संकलन है। उनके उपदेश सार्वजनीन स्वरूप के हैं और सभी को उनसे मार्गदर्शन प्राप्त होता है। ईश्वरभक्ति तथा मानवप्रेम ये उनके जीवन के दो म……続きを見る
श्रीरामचन्द्र की वाणी' पुस्तक में भगवान् श्रीरामचन्द्र के महत्वपूर्ण उपदेशों का संकलन है। भगवान् रामचन्द्र की संज्ञा 'मर्यादापुरुषोत्तम' है। मानव-जीवन के नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास की दृष्टि से उनका……続きを見る
संसार हमारे देश का अत्यंत ऋणी है। यदि भिन्न-भिन्न देशों की तुलना की जाय तो मालूम होगा कि सारा संसार सहिष्णु एवं निरीह भारत का जितना ऋणी है उतना किसी और देश का नहीं।.... पुराने समय में और आजकल भी बहु……続きを見る
प्रस्तुत पुस्तक में श्रीमद्भगवद्गीता तथा श्रीमद्भागवत ग्रन्थों में भगवान् श्रीकृष्ण के जो अमूल्य उपदेश हैं उनका संकलन है। इन चुने हुए उपदेशों का प्रभाव मानवजीवन पर चिरकाल पड़ेगा तथा उसे उन्नत बनाएगा।……続きを見る
युवाओं के मन की शक्तियों को जगाने के लिए, अन्तर्निहित आत्मविश्वास और साहस का अवलम्बन कर वे अपने जीवन की समस्याओं का सामना कर सकें, अपने हृदय को प्रेम और सहानुभूति से परिपूर्ण कर सकें, युवाओं को श्रे……続きを見る
स्वामी विवेकानन्द ने भारत के पुनरुत्थान तथा विश्व के उद्धार के लिए जो महान् कार्य किया, वह सभी को विदित है। वे चैतन्य एवं ओजशक्ति की सजीव मूर्ति थे। उनका दिव्य व्यक्तित्व उनकी वाणी मे प्रकट होता है।……続きを見る
भगवान् श्रीरामकृष्णदेव के उपदेश सार्वजनीन स्वरूप के है। मानव-जीवन का अन्तिम लक्ष्य कौनसा है, जीवन सफल तथा कृतार्थ बनाने के लिए किन बातों की आवश्यकता है, इसके सम्बन्ध में उनकी वाणी सभी के लिए उपयुक्त……続きを見る
वैदिक धर्म तथा संस्कृति के लिए श्रीशंकराचार्य ने बहुत बड़ा कार्य किया है। उपनिषद् ब्रह्मसूत्र तथा गीता पर भाष्य लिखकर उन्होंने हमें धर्म का यथार्थ स्वरूप समझाया है। ज्ञान के साथ भक्ति का आविष्कार भी ……続きを見る
भगवान् बुद्ध के उपदेश मानवजाति के लिए एक प्रकाशस्तम्भ के समान है । उनके उपदेशों से मानवमात्र को नया आलोक प्राप्त होता है । चार आर्यसत्य, पंचशील, अष्टांग मार्ग, ध्यान, करुणा, सेवा इत्यादि के सम्बन्ध ……続きを見る
स्वामी विवेकानन्दजी के कुछ महत्वपूर्ण व्याख्यान तथा उनके कुछ प्रवचनों का सारांश ''आत्मतत्त्व'' के रूप में पाठकों के सम्मुख है। 'आत्मा', ' आत्मा:उसके बन्धन तथा मुक्ति', 'आत्मा, प्रकृति तथा ईश्वर', ' ……続きを見る
मन की शक्तियाँ सचमुच बड़ी ही आश्चर्यजनक हैं। स्वामी विवेकानन्दजी ने इस पुस्तक में इन शक्तियों की बड़ी अधिकारपूर्ण रीति से विवेचना की है तथा उन्हें प्राप्त करने के साधन भी बताए हैं।続きを見る
वे आत्मास्वरूप थे! वे जानते थे कि वे शुद्ध आत्मास्वरूप हैं - देह में अवस्थित हो मानवजाति के कल्याण के लिए देह का परिचालन मात्र कर रहे हैं। देह के साथ उनका केवल इतना ही सम्पर्क था। वे वास्तव में विदे……続きを見る
जब हम कहते हैं कि आज का ही जगत् कल का भावी जगत् होता है, तो इसका क्या अर्थ है? आज के मनुष्य और उनका योगदान ही भविष्य का जगत् बनेगा। उनकी अपनी जीवन शैली होगी। आज के बयोवृद्ध पुरुष भले ही भविष्य में न……続きを見る
आज जो समाज की बीमार मानसिकता तथा शासन में व्याप्त अनुशासनहीनता के कारण आपके सामने विभिन्न समस्यायें हैं, उनका व्यक्तिगत आधार पर कोई उत्तर नहीं है। यह एक बिडंबना है कि जहाँ दूसरे सभी देशों में जनता अ……続きを見る